संतोष पांडेय ने कहा कि हसदेव और तारा कोल ब्लॉक को लेकर भूपेश बघेल का मौजूदा रुख कांग्रेस के राजनीतिक दोहरेपन को उजागर करता है। उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री जयराम रमेश के 23 जून 2011 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि तारा कोल ब्लॉक को उस समय स्टेज-1 की पर्यावरणीय मंजूरी दी गई थी।
“जिस फैसले की नींव कांग्रेस ने रखी, उसी पर अब सवाल”
भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में लिए गए फैसलों की जिम्मेदारी से अब बचा नहीं जा सकता। उनका आरोप है कि सत्ता में रहते हुए भूपेश बघेल ने हसदेव को लेकर अलग रुख अपनाया और अब विपक्ष में आने के बाद उसी मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है।
पांडेय ने तंज कसते हुए कहा कि भूपेश बघेल के “आंसुओं से घड़ियाल भी शरमा जाएगा।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब हसदेव में खनन का विरोध हो रहा था, तब कांग्रेस नेताओं का रुख क्या था और अब राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के बाद उनका बयान क्यों बदल गया है।
तारा कोल ब्लॉक की नीलामी पर भी भाजपा का जोर
संतोष पांडेय ने कहा कि तारा कोल ब्लॉक का आवंटन किसी गुप्त प्रक्रिया के जरिए नहीं हुआ है। उनके अनुसार, इसका आवंटन केंद्र सरकार की खुली और प्रतिस्पर्धी ई-नीलामी प्रक्रिया के तहत हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नीलामी के बाद खनन शुरू करने के लिए आवश्यक वैधानिक और पर्यावरणीय अनुमतियां पूरी करना अनिवार्य है।
भाजपा का दावा : पर्यावरण और विकास दोनों पर फोकस
पांडेय ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध बताते हुए कहा कि विकास कार्यों के साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने पिछले दो वर्षों में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 7 करोड़ पौधे लगाए हैं और हर वर्ष लगभग 3.5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने भारतीय वन सर्वेक्षण की इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट-2023 का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में वन एवं वृक्ष आवरण में वृद्धि दर्ज की गई है। भाजपा का कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर आगे बढ़ना सरकार की नीति है।
“कांग्रेस को अपने पुराने फैसलों का जवाब देना चाहिए”
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह हसदेव के मुद्दे पर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार पर आरोप लगाने से पहले कांग्रेस नेताओं को यूपीए शासनकाल में लिए गए फैसलों और अपने कार्यकाल की भूमिका पर जवाब देना चाहिए।
हसदेव अरण्य को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति में पर्यावरण, खनन और विकास के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। भाजपा जहां पुराने कांग्रेस शासन के फैसलों को मुद्दा बना रही है, वहीं कांग्रेस की ओर से हसदेव को लेकर उठाए जा रहे सवाल राजनीतिक बहस को और तेज कर रहे हैं।




