उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान मलेरिया, टीबी, सिकल सेल, कुष्ठ रोग, मुख कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान कर उपचार शुरू किया गया। वहीं 60 हजार से अधिक गंभीर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया और 10,938 हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी एवं उपचार सुनिश्चित किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हाल में सामने आए मलेरिया के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता से काम कर रहा है। मितानिन, एएनएम और स्वास्थ्य कर्मी गांव-गांव पहुंचकर जांच, उपचार, सर्वे और जनजागरूकता अभियान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि “मलेरिया से एक भी मृत्यु न हो, यही हमारा लक्ष्य है।”
उन्होंने बताया कि सतत निगरानी और जनसहभागिता के चलते बस्तर की मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत रह गई है। वहीं राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) 5.21 से घटकर 0.90 तक पहुंच गया है।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.89 लाख से अधिक संस्थागत प्रसव हुए हैं। वहीं प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की नियमित विशेषज्ञ जांच और हाई-रिस्क गर्भावस्थाओं की पहचान कर उपचार किया जा रहा है।
आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए प्रदेश में 375 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस शुरू की गई हैं। जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच 6.50 लाख से अधिक लोगों को समय पर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
उन्होंने बताया कि HLL Lifecare Limited के सहयोग से प्रदेश के 1,051 स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक पैथोलॉजी जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही प्रदेश के सभी 10 मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होंगे।
प्रेसवार्ता के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने खाद्य सुरक्षा पर भी सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश में एनॉलॉग पनीर के उपयोग और बिक्री पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।






