Home छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का निर्देश हर किसान तक समय पर पहुंचे खाद-बीज

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का निर्देश हर किसान तक समय पर पहुंचे खाद-बीज

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रायपुर, 27 जुलाई ।  देशभर में डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) की सीमित उपलब्धता के बावजूद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए लगातार निगरानी कर रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसी भी किसान को उर्वरक की कमी का सामना न करना पड़े तथा कालाबाजारी, जमाखोरी और निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

कृषि विभाग के अनुसार खरीफ 2026 के लिए 3 लाख मीट्रिक टन डीएपी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 21 जुलाई 2026 तक प्रदेश में 1,84,413 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण किया गया, जिसमें से 1,26,360 मीट्रिक टन किसानों को वितरित किया जा चुका है। इसके बाद भी 58,054 मीट्रिक टन डीएपी समितियों और गोदामों में उपलब्ध है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अधिक उपलब्धता दर्शाता है।

सरकार किसानों को केवल डीएपी पर निर्भर रहने के बजाय एनपीके और अन्य संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि संतुलित उर्वरक उपयोग से फसलों की पोषण आवश्यकताएं बेहतर ढंग से पूरी होती हैं और डीएपी पर निर्भरता कम होती है।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तय करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है, लेकिन किसानों से निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली रोकने के लिए लगातार निरीक्षण किए जा रहे हैं। उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।

अब तक प्रदेशभर में 4,878 उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया गया है। इस दौरान 625 नोटिस जारी, 183 केंद्रों पर बिक्री प्रतिबंध, 98 केंद्रों से उर्वरक जब्त, 97 लाइसेंस निलंबित, 11 लाइसेंस निरस्त, 56 प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत तथा 7 एफआईआर दर्ज की गई हैं।

भारी वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों में जहां दोबारा बुआई की आवश्यकता पड़ रही है, वहां जिला प्रशासन और कृषि विभाग किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, बीज और उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए विशेष अभियान चला रहे हैं।

राज्य शासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं और सहकारी समितियों से ही निर्धारित मूल्य पर उर्वरक खरीदें। यदि कहीं भी कालाबाजारी, अधिक मूल्य वसूली या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता दिखाई दे, तो इसकी सूचना तत्काल कृषि विभाग या जिला प्रशासन को दें, ताकि दोषियों के विरुद्ध त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

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