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“एक राखी पेड़ के नाम” : रक्षा सप्ताह के अंतर्गत लेमरू में वृक्ष संरक्षण का अनूठा संदेश

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कोरबा, 25 अगस्त 2026।

वनमंडलाधिकारी कोरबा श्री जितेंद्र उपाध्याय के मार्गदर्शन एवं उपवनमंडलाधिकारी उत्तर कोरबा श्री रामसिंह राठिया तथा उपवनमंडलाधिकारी दक्षिण कोरबा श्री सूर्यकांत सोनी के निर्देशन में वन परिक्षेत्र अधिकारी लेमरू श्री देवव्रत सिन्हा एवं वन परिक्षेत्र लेमरू के समस्त अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा 22 से 28 अगस्त तक “एक राखी पेड़ के नाम” की थीम पर रक्षा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है।

इस विशेष अभियान का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से वृक्षों, वनों एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण के प्रति ग्रामीणों में जागरूकता एवं जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करना है।

रक्षा सप्ताह के प्रथम दिवस 22 अगस्त को संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण एवं चयनित वृक्षों का चिन्हांकन किया गया। इसके पश्चात चयनित वृक्षों के आसपास स्वच्छता अभियान चलाया गया, जिसमें वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ ग्रामीणों एवं वन प्रबंधन समिति के सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता की। ग्रामीणों के सहयोग से वृक्षों के आसपास की घास-फूस एवं अनावश्यक झाड़ियों की सफाई कर स्थल को व्यवस्थित किया गया।

रक्षा सप्ताह के आगामी चरण में “एक राखी पेड़ के नाम” कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित वृक्षों को प्रतीकात्मक रूप से राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान, कृतज्ञता एवं संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि जिस प्रकार रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच स्नेह एवं संरक्षण का प्रतीक है, उसी प्रकार वृक्ष भी मानव जीवन एवं पर्यावरण की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अतः वृक्षों की रक्षा करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के दौरान वन प्रबंधन समिति के सदस्यों एवं ग्रामीणों को वन एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण का संकल्प दिलाया जा रहा है। साथ ही वनों की सुरक्षा, अवैध कटाई पर रोक तथा वन्यप्राणियों के संरक्षण के प्रति सजग रहने एवं वन विभाग के साथ समन्वयपूर्वक कार्य करने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया जा रहा है।

वन विभाग द्वारा जनभागीदारी को वन संरक्षण का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए स्थानीय समुदाय को संरक्षण गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष बल दिया जा रहा है। “एक राखी पेड़ के नाम” अभियान केवल वृक्षों को राखी बांधने तक सीमित न होकर प्रकृति के प्रति सम्मान, संरक्षण और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने की एक सार्थक पहल है।

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